Friday, 20 October 2017

Mr. बड़बड़ कुमार

सोचने का भी एक तरीका होता है , सोचना भी बहुत सी छोटी छोटी चीज़ों की तरह कोई नहीं सिखा सकता है ।
जैसे पिछले के बारे में सोच के हम उदास हो लेते है और आगे के बारे में भी ।
जो खुश रह पाते है वो कुछ होते है चलते वक़्त के साथ साथ जीते है ।
अंग्रेजी में जिसे लिव इन प्रेज़न्ट बोलते है ।
ऐसे ही एक व्यक्ति थे " बड़बड़ जी "
उम्र यही कोई 25 बरस ।
रंग-  साँवला
कद यही कोई  साढ़े पांच फीट
एक दम फुर्तीला इंसान , उसके अंदर ऐसी शक्ति कि मिट्टी को भी सोना कह के बेच दे ।
एक दम परफेक्ट सेल्समैन ।

दिवाली के साथ आते है भूले बिसरे दोस्तों के इनबॉक्स & व्हात्सप्प मैसज ।
सुबह माँ इससे पहले उठाये ।
फ़ोन की स्क्रीन पे फ़्लैश होते है ढ़ेरो फ़ोन कॉल्स और मैसेज । अपनी कमी कहूँ या बुरी आदत 
मुझे फ़ोन के general mode से गुरेज़ है ।
अक्सर फ़ोन को साइलेंट मोड पे ही रखा है ।
आलस कह ले या मजबूरी ।
मुझे इसकी टिंग टोंग की दख़ल बर्दाश्त नहीं होती ।
फ़ोन से शुरू से ही ख़ास दोस्ती नहीं है ।
ऐसा समझ लीझिये इसके साथ हमारी अरेंज मैरिज है ।
न ही मैं इसे कभी समझ पाया और न ही ज़रूरत को ।

कुछ साल पहले घर से एक जगह दूर कही नौकरी मिली थी । कंपनी के नियमो के अनुसार सैलरी अकाउंट किसी निजी बैंक में अनुवार्य था । सरकारी बैंक में खाता खुलवाना भी आफ़त है और प्राइवेट बैंक से पहले कभी सामना नहीं हुआ था  ।
मुझ जैसे इंसान को बैंक के नाम से खिन्न आती है । निजी बैंक में खाते की अहतियाज़ थी सो पहुँच गये बैंक में ।

ससुराल जाने पे जितनी ख़ातिरदारी जमाई राजा की होती है उसके लगभग ही प्राइवेट बैंक में ।
आदिल कुमार नामक एक सेल्समैन से मुलाकात हो गई ।
बातचीत का अंदाज़ उनका ऐसा था कि जैसे जो उन्होंने कह दिया सात वचन । जान पहचान में ही उन्होंने ने मेरे शहर से अपने 3-4 रिश्तेदार बता दिए । जिस दफ्तर में हमें नौकरी मिली थी वहाँ का हर व्यक्ति उनका दोस्त ।जिस व्यक्ति का नाम लेते उनका नंम्बर फोन डायरेक्टरी में से निकाल के दिखाते । एक दम बड़बड़ एक्सप्रेस ।

खाता खोलने के नाम पर सिर्फ हमारा आधार कार्ड लिया गया और कहा गया बाकी की सेवाएं आप घर बैठे प्राप्त कर पाएंगे आपको सिर्फ एक फोन मिलाना है - " आदिल कुमार की ये नवाज़िश थी या जॉब ???
मैने पुछा नहीं ।
मुझे ज्यादा मित्रता बनाना पसंद नहीं ।
मुझे अकेलापन नहीं एकांत अच्छा लगता है । किसी से बिन बात बतियाना अजीब भी लगता है ।
मैंने हैरानी परेशानी में अपना नँबर बड़बड़ कुमार को दे दिया ।

जिस तरह पहले भी जिक्र किया है ।
फोन से ख़ास दोस्ती नहीं है तो आप अंदाजा लगा सकते है कि मैं एक मिलनसार शख़्सियत नहीं हूँ , मगर मैं नाशुक्रा भी नहीं हूँ ।
बिलकुल इसके उल्ट थे "आदिल कुमार जी | "

"बड़बड़"  के नाम से उनका कांटेक्ट नाम फ़ोन में सेव कर लिया । तअज्जुब की बात ये थी कि आदिल कुमार का कोई निश्चित वक़्त नहीं था फ़ोन करने का ।
हर वक़्त बैंक की हर समस्या के सुझाव के लिए तैयार रहते । दिन में 2 बार माँ से बात करता हूँ उसके इलावा सिर्फ बड़बड़ कुमार जी थे जिन्हें मेरी चिंता होती ।
"पंडित जी मैं खाने पे बैठा था तो सोचा आप से भी पूछ लू आप शहर में नए है तो पूछ लू खाना वाना सही मिल रहा है न ??
कभी कभी दिल करता था बैंक में अकाउंट बंद करवा दूँ , डेबिट कार्ड की कोई समस्या हो या फिर किसी और employee की बैंक स्टेटमेंट ।

मेरे नाम से मेरे ही दफ्तर के लोगों को मेरे साथ पक्की दोस्ती बता कर बाकी employees का खाता भी अपने बैंक में खोलते  । उसके इलावा कोई क्रेडिट कार्ड ,कोई लोन मेरे नाम से चिपकाते । परफेक्ट सेल्जमैन।

आदिल कुमार जी थे एक अच्छे सेल्समैन ।
मेरा तबादला कुछ ही ..दिनों में हो गया ।
नाम बड़बड़ नाम से वैसे के वैसे ही सेव था ।
मेरी आदत भी वैसे के वैसे ही थी फ़ोन न उठाने की ।
4 साल तक हर दिवाली , होली पे मैसेज आता ।
कभी कभी फ़ोन भी आता और बड़बड़ कुमार बताते के

उनकी भी प्रोमशन हो गयी है 50 खाते और 20 क्रेडिट पे बैंक ने उन्हें नया मोटरसाइकिल दिया है ।
मुझे बड़बड़ में एक न ही दोस्त दिखता
और न ही कोई हमदर्द । वो सिर्फ एक मशीन था ।
जिसे सिर्फ काम करना है उसकी भी भला कोई ज़िन्दगी ।
हर किसी को कस्टमर की नज़र से देखने वाले शख़्स।

मुझे बड़बड़ जैसे लोग बड़े अजीब लगते है ।
हमेशा हैरान होता हूँ - कैसे सिर्फ दिमाग से ही जी लेते है ।
सालो तक बड़बड़ का मैसेज हर दिन त्यौहार पे आता न ही मैं कोई दिलचस्पी दिखाता ... मगर वो साल दर साल शुभकामनाये भेजता और मै दिनों बाद देखता और डिलीट करता ।
रिप्लाई में थोड़ी बहुत दिलचस्पी दिखा लेता ।

अब एक साल से बड़बड़ का कोई संदेश नहीं कोई खबरसार नहीं सोचा शायद वो भी सोचता होगा कि क्या फायदा जब कोई आगे से जवाब न दे ।
इस साल मुझे अपना खाता बंद करवाना था ।
कही से नंम्बर ढूंढा  , डायल किया मगर कोई जवाब नहीं मिला ।
ऐसे ही होते है सेल्समैन जहाँ इनकी कोई सेल नहीं वहाँ काहे की सर्विस । सौ गालिया बकी की साला जब काम नहीं था तो दस दस फ़ोन मगर आज जरूरत है तो कोई जवाब ही नहीं ।

वक़्त निकाला और पी. एफ़ क्लियर करने के बाद उसी ब्रांच पंहुचा और खाता बंद करवाने की अर्जी डाली ।

ब्रांच मैनेजर से सीधा शिकायत रख दी
देखिये मैनेजर साहब काम के वक़्त फ़ोन क्यों नहीं उठाते आप लोग ?
मैनेजर साहब ने बताया बाकी के सेल्समैन न ही किसी को फ़ोन करते है और न ही खुद किसी को करने देते है । ये आदिल कुमार के शुरू किये हुए ट्रेंड थे । सारा बैंक अपने कंधो पे उठा रखा था ।
लेकिन जरूरत के वक़्त फ़ोन तो उठाना चाहिए न मैनेजर साहब ।
मैंने पूछा तो अब कहाँ है वो ?

मैनेजर बोला - न्यू ईयर की रात  को सड़क हादसे में मर गया । शराब पीने की लत्त थी ।

पसीना पोंछते पोंछते मैं बैंक से बाहर निकला और घर आ कर फ़ोन को general mode पे कर दिया ।
हर एक शुभकामना ज़िन्दगी के मायने बदलती है ।
ये दुनिया प्यार से चलती है ।

मैसेज और फ़ोन कॉल कोई भी हो अब रिप्लाई जरूर करता हूँ ।

पंकज शर्मा

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Friday, 13 October 2017

शायद .... वो बात

​वो वो न रही 

मैं मैं न रहा

बरसों बाद की है मुलाकात

उलझन भरी है अंखईओ में

बदले बदले से है चेहरे 

कहीं कुछ तेरे , 

कुछ मेरे 

वो बात न रही .....


जुबां भी बदली

अंदाज़ भी बदले

वो हाऊ आर यू ? (hw's you )?

आई एम फाइन । (Am fine)

पूछने के बाद 

नहीं शुरू हुए 

वों किस्से

कहने सुनने और पूछने में .......

वो बात न रही 

शायद अब हाथों से नहीं

चमच से लगता है 

 राज़मा चावलों का स्वाद उसको..

बिन बातों के 

कैसा अच्छा लगता है

खाने का स्वाद उसको

आमने सामने ख़ामोशी में..........

वो बात न रही ...


कितनी खनकदार थी 

हँसी उसकी

ये भी न था 

शायद याद उसको

शायद मेरे कुछ कहने

उसके हँसने

अब की हँसी मुस्कराहटों में

वो बात न रही ...

नाम बदला

शहर बदला

क्या था जो नहीं बदला

पुकारे तुम्हारा सा कोई नाम

याद है एक पुराना

मेरा एक पासवर्ड जो था

तेरे नाम के बाद मेरा नाम

दो नामों के बीच  ......

वो बात न रही 

मेरे घर से तेरी और आना

तेरा अपने घर से मेरी और आना

वो एक जगह अब भी वही है

अब चुपचाप गुज़र जाते है

रोज़ तो मिलते है

पर इन मुलाक़ातों में

वो बात न रही

वही तुम हो 

वही मैं हूँ

वही शहर है 

वही ठंड की बरसात है

वही हम है 

वही तुम हो

वही ख्यालात है

कुछ तेरे अंदर 

कुछ मेरे अंदर

शायद........

 वो बात न रही

Pankaj sharma

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Sunday, 8 October 2017

इबादत

मैं कभी भी कोई बैंक कर्मचारी नहीं बनना चाहता हूँ ..
न ही खाने पीने की चीजों की बिक्री करने वाला ...
न ही विदेशी कंपनियों का सेल्समैन...
न ही कोई संघी
न ही हुड़दंगी
न किसी पार्टी का मुखिया
और न ही कोई टैक्सी ड्राइवर
न ही इधर उधर फुदकता सुपरहीरो
मैं तो चाहता था बस उसे देख स्कू
बस इतना चाहता था
शहर की सबसे ऊंची जगह पे खड़ा हो के
नीचे घनी इमारतों के बीच
उस लड़की का घर देख स्कू
जिससे मैं मोहब्बत करता हूँ
इस लिए मैं एक मजदूर बन गया ।

ख्याल

मेरी आँखों से देखना
सब कुछ बदल रहा है ।
जिसे सिर्फ तुम और मैं ही देख सकते है ।
ये जगह मेरे जितनी स्प्रिचुअल नही रही है
मगर तुम्हारी तरह वायलेंट हो रही है ।
तुम्हारे होते ये जगह भी बात करती
नहीं हो
तो ये भी नाराज़ लगती है
मुँह फुलाएं .....

मैं ऐसे ही लिख रहा हूँ ।
बस वैसे ही
जैसे अनाथालय में बहुत साल बाद अपने अंधे बच्चो से मिल रहा हूँ ।
तुम्हारे जाने के बाद -
क्या कद निकल आया है उनका ।
कितने छोटे पड़ रहे है लफ्ज़ .......
जो पहनाने लाया हूँ ।

सब कुछ बदल रहा है ।
चेहरा
लफ्ज़
शौंक
लेकिन आदतें वही है ।
जब भी किस्से शुरू करता हूँ ,
सब कुछ बदला बदला सा लगता है ।
जैसे कोई सामने जिद्द पे अड़ा हो ,
आँखे बंद , और कानों पे हाथ धरे ।

जैसे जैसे उम्र बीत रही है .....
खिलौने महंगे होते जा रहे है ।

जिद्द को पूरा तो करना है
क्या बचा है आखिर इस ज़िद्द के इलावा
अभी के लिए जाना होगा
मगर मैं लौटूगा ...
हो सके तो ख्याल संभाल के रखना ।

पंकज शर्मा

Friday, 8 September 2017

पाश

पाश 9 september 1950 से अब तक ..............

तुम्हे पाश समझ में आएगा ।

उसका हर लफ्ज़
हर बात
नहीं गूंजती कानो में अब तक ,

जिस कत्ल को हादसा समझते हो अब तक ....
जब तुम्हारे हाथो से खिलौने छीन के खेतों में भेज दिया जायेगा ।
स्कूल की छूटी के बाद दुकानों में डाल दिया जाएगा ।
कॉलेज की डिग्रीे दे कर दफ्तर दर दफ्तर भटकाया जाएगा ।
लाऊड स्पीकर से आती आवाज़ों से जब तुम्हारा दम घुट जाएगा ।
काम से लौटते हुए जब सपनो को जब सूरज के साथ डूबते देखा जायेगा ।
धीरे धीरे डूबता हुआ सूरज
जैसे जैसे,  आसमान काला पड़ता जाएगा ।

मेरे दोस्त तुम्हे पाश समझ आ जायेगा

हर वो किताब जिसके पहले पन्ने पे पाश लिखा है उसे तुम जरूर पड़ना ।

उसमें कविता नहीं वो इतिहास है जो सदियों से चलता आया है ।
इतिहास को यही रोकना तुम्हारी जिम्मेदारी है ।

पाश - "ज़िन्दगी से प्यार करने वाला शायर "
जो किसी के इंतज़ार में डूब के मरना नहीं उसके साथ जीना चाहता था ।

🏧 प्यार करना और जीना उन्हे कभी नहीं आएगा
जिन्हें जिन्दगी ने बनिए बना दिया है ।

जो मर के भी हमारे अंदर जिन्दा रह जाए उसे ही तो पाश कहते है -
🔜*मैं आदमी हूं, बहुत कुछ छोटा-छोटा जोड़कर बना हूं
और उन सभी चीज़ों के लिए
जिन्होंने मुझे बिखर जाने से बचाए रखा
मेरे पास शुक्राना है*

🔜पाश कहते है - " *मैं शुक्रिया करना चाहता हूं
प्यार करना बहुत ही सहज है
जैसे कि जुल्म को झेलते हुए खुद को लड़ाई के लिए तैयार करना*

🔝*युग को पलटने में लगे लोग
बुखार से नहीं मरते*

🔄*तुम्हारे बगैर अवतार सिंह संधू महज पाश
और पाश के सिवाय कुछ नहीं होता*

🔚*मुझे जीने की बहुत-बहुत चाह थी / कि मैं गले-गले तक जिंदगी में डूब जाना चाहता था / मेरे हिस्से की जिंदगी भी जी लेना मेरे दोस्त*

दिल के करीब किसी किरदार को पाता हूँ वो पाश है जिसकी कविताओं में सब कुछ है -

🔃*वह तीन ही रंगों से वाकिफ़ रहा एक रंग ज़मीन का था जिसका कभी भी उसे नाम न आया एक रंग आसमान का था जिसके बहुत से नाम थे   पर कोई भी नाम उसकी ज़ुबान पर चढ़ता नहीं था एक रंग उसकी पत्नी के गालों का था जिसका कभी भी उसने शर्माते नाम नहीं लिया*

जहां कलावादी कवि मैं-मैं की रट लगाए हुए थे उसने ‘हम’ की बात की। उसने पलायन की नहीं समस्या से जूझते हुए हमेशा ही अपने हकों के लिये लड़ने की बात की

जिसने इंकलाब जिंदाबाद के मायने लफ़्ज़ों में समझाए ।
इंकलाब कविता भी होता है ।
Remembering अवतार सिंह संधू #पाश on his 67th anniversary.

पाश चलो कविताओं में मिलते है ।

पंकज शर्मा

Monday, 10 July 2017

Keep Smiling

http://wp.me/p6fG4T-3o

मोहतरमा

तारीख - 7 जुलाई 2017
स्थान - मित्तल माल बठिंडा फ़ूड कोर्ट

खाते वक़्त दूई चीज़ों के बारे में बराबर ध्यान रखते है ।
न ज्यादा बात करो और न ही ज्यादा सोचो । पर हम अपने किसी मित्र के इंतज़ार में हम तो सिर्फ अपने नाखून ही खा रहे थे । टाइम पास के लिए फ़ोन में ऊँगली मारना बेहतर समझा मगर एक सामने के टेबल पे एक मोहतरमा बैठी थी पहली नज़र में कहूँ तो डिस्ट्रैक्शन ।

बोले तो 2 टेबल सामने क्रिकेट की भाषा में बोले तो लॉन्ग ओन पे ।  मोहतरमा अकेली थी । मोहतरमा के सामने खाने की कोई आइटम रखी थी लेकिन उसका नाम हमें पता नहीं । हाथ में चमच्च है मगर एक बार भी चमच्च मुँह तक नहीं गया । मोहतरमा देखने में लग रही है कि किसी के इंतज़ार में आँखों किसी को ढूंढती हुई । बेचैनी देखते ही पता चल रही थी । अचानक मोहतरमा का पारा चढ़ा और
ये लो मोहतरमा ने राईट कान से हेडफोन निकाल के ज़ोर से टेबल पर पटक दिया ।
अब मोहतरमा धीरे धीरे चमच्च को मुंह तक ले के जा रही है मगर ये क्या मोहतरमा ने चमच्च भी गुस्से में फेंक दिया और इसी के साथ ही उन्होंने बाकी लोगो का ध्यान भी अपनी तरफ खींच लिया ।  मोहतरमा ने गुस्से में अपना माथा पकड़ लिया और पास पड़े कोल्ड ड्रिंक का हल्का सा सिप लिया । लोगो ने 6-7 सेकंड तक मोहतरमा की तरफ घूरा और अपनी अपनी बातचीत में फिर दुबारा वापस चले गए । हमारी नज़रें अब भी मोहतरमा को पूरी तरह से देखती हुई । हमारे अंदर भी थोड़ी सी हिम्मत हुई और हमने एक स्पून ले के मैडम के टेबल पे रख दिया । और वापस आ के अपनी क्रीज़ पे बैठ गए और फिर से मोहतरमा की तरफ देखने लगे । मगर इस बीच हमारा उसके टेबल पे चमच का रखना मोहतरमा ने शायद नोटिस  ही नहीं किया । मगर एक चीज़ बार कर रही थी जेब से फ़ोन निकालती आँखों में आये आँसूओ के जालों को थोड़ा सा साफ़ करती और दोबारा शीशे से बाहर देखना शुरू करती फिर थोड़ी देर बाद फोन निकालती खिटपिट फोन को झाँक के दोबारा अंदर डालती ।
अपने आप में कुछ गहराई से सोच रही है बार बार फिल्म ऑडी की तरफ देख रही है शायद कोई वहां से निकलेगा । उसकी सारी परेशानी को मैने लंबे वक़्त देखा । थोड़ी देर में वो सर पकड़के रोने लगी । इस टाइम मेरा हाल बिलकुल वही हो रहा था जो मोहब्बतें में जिम्मी भाई का प्रीती को देख के हुआ था । वैसे मैं तो वो सात दिन मूवी का प्रेम कुमार पटियाले वाला हूँ जिसने 30 मिंट से पानी तक नहीं पिया बल्कि बेल्ट का एक हुक और क्स के बाँध लिया कि कहीं से भी भूख एंट्री न मार ले मगर लड़की के आंसुओं ने सब कुछ भुला दिया । लड़की के अंदर और इसकी ज़िन्दगी में ऐसी कौन सी समस्या चल रही है इसको जानने के लिए दिल बोल रहा था जा कंधा जा ।
जा पूछ ले लड़की की समस्या ।
पर मैंने सोचा इसी बीच में शायद उसे कोई मिलने आ जाए  इस लिए वेट कन्धा वेट ।
लड़की ने ब्लैक टॉप पहन रखा है ।
साँवला रंग ।
आँखों में जो ऑय लाइनर था वो बह बह के गालों तक आ चुका था । मगर मैं 2 मिंट और वेट कर रहा था हिम्मत जुटाने की ।
वैसे रोती हुई लड़किया खूबसूरत लगती है ।
मगर अंदर एक किसी शायर का शेर याद आया क्यूँ न किसी रोते को हसाया जाएं ।
जब उसकी गंगा जमना नाक से बहने लगी तो हमारे दिल को भी आराम न आया और तशरीफ़ उठा के उसके सामने जा कर सजा दी और हाथ में किनले की पानी की बोतल से एक पेग उसे बना के दे दिया । हमारी नज़र उसके फ़ोन पे पड़ी दिखने में लड़की के फ़ोन की बत्ती जली दिखाई दिया एक वॉलपेपर जिसमें वो किसी के साथ हंस रही है । दिलासा या वज़ह पूछने की जल्दी नहीं की ।
देखो मैं सामने टेबल पे बैठा कब से देख रहा हूँ । मैं तुम्हारी उदासी का इलाज़ तो नहीं कर सकूँगा । मगर किसी की तकलीफ हो देख नहीं पाता हूँ तुम्हारी जगह कोई और भी बैठा होता तो फिर भी उसके साथ मैं ये बात ही करता । अगर ऐसा ही इग्नोर करते हुए चुपचाप चला जाता तो गिल्ट मेरी जान ले लेता । तुम्हारी कोई भी प्रॉब्लम हो उसे भूलो या फिर यहाँ बुलाओ । मगर प्लीज ऐसे इन गरीबो के चमच्च मत तोड़ो ।
तुम्हारी ज़िन्दगी में कुछ भी हुआ हो किसी ने भी तुम्हे तकलीफ पहुंचाई हो वो भी सिर्फ गिल्ट महसूस करके मुक्त नहीं हो सकता । एक इंसान का दूसरे इंसान से मिलना सबसे बड़ी दुर्घटना होती है और ................................ उसने पानी का गिलास ख़तम किया हमने एक और गिलास भर के उसे दिया उसने पहला लफ्ज़ बोला - "बस"
वाह वाह !! क्या बस बोला । चाहे आज तक हम सिर्फ  रोडवेज की बस सूंघे थे । मगर उसके मुंह से बस भी मर्सेडीज़ लगा ।
हमने उसकी प्लेट में पड़े खाने को देख पुछा क्या है ये ।
इस बार उसने क्या बोला समझ तो नही आया मगर देखने में लग रहा था किसी ने चार प्रोंठो के ऊपर शिमला मिर्च और टमाटर की चटनी गिरा दी हो । उसका ध्यान कहीं और था तो हमने खाया तो पता चला कि ये पिज़्ज़ा जैसा ही कुछ है मगर खाते खाते लड़की से पुछा के क्या हुआ । उसने सर न में हिलाया । लडकिया कभी भी कुछ नही बताती मेरे घर में भी ऐसे ही है ।
उसके अंदर पता नही क्या चल रहा था 15 मिंट तक उसके सामने बैठा सवाल कर के पुछा शायद मैं कोई उसका  जवाब दे सकता । पूरे माल को नज़र घुमा के देखा सबसे सच्चा चेहरा इस लड़की का ही लग रहा था ।
इतने में मेरे दोस्त आये और मुझे जाना था ।
लड़की से मैं सॉरी बोल के उठने लगा तो उसने थोड़ा सा न मात्र सा हँसते थैंक्यू बोला ।
ये थैंक्यू मुझे थैंक्यू ही लगा । मैंने भी उसे keep smiling का मशवरा दिया । बिना वजह बताये वो चली गईं ।
मैं भी काम ख़तम करके उसे ढूंढने वही आया पर मोहतरमा नही मिली ।
बस उसकी हंसी याद है । शायद यही ज़िन्दगी है कभी हंसना कभी रोना । मैं कई बार रोता हूँ सब के सामने भी रो देता हूँ पर जब कोई आंसू पोछने वाला हूँ तो तकलीफ कम होती है । एक जिंदगी है, जो करना चाहते हो कर लो, जरुरी नहीं की क्रिकेट खेलने वाला सचिन की तरह ही खेले…सिर्फ मैदान में आ जाए उतना ही काफी है…जो सोचा है करो और करने के बाद कभी मत सोचो…वरना 55 की उमर में जब 20 साल के लौंडो को ज्ञान दोगे तो वो भी बोलेगा अंकल  हिल गये हो क्या ।
काम धाम और सपनो के पीछे भागते भागते  जीना भूल जाते है । लड़की को देख कर प्रॉब्लम तो नही समझ पाया । मगर एक चीज़ बराबर समझा अपनी हंसी के इंजन की चाबी किसी को न दे । कई लोग होते है जिनके बिना हमारा गुज़ारा नही हो सकता । लेकिन जिंदगी जीने की बात हो तो नो ईफ़ नो बट और न ही स्टार लगी कंडीशन अप्लाई । नफरत हो या मोहब्बत वक़्त के साथ कम हो ही जाती है ।

Thursday, 18 May 2017

GNDU ਹੋਸਟਲ

ਮੁੰਨਾ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਇਸ ਸਸਤੇ ਫਰੁਸਟ੍ਰੇਸ਼ਨ ਬਜ਼ਾਰ ਚੋ ਕਰੋਧ ਨਹੀਓ ਲੈਣਾ ........
100 ਪਰਸੇੰਟ ਸੇਲ ਹੋਵੇ ਭਾਵੇਂ ਲੋਡ ਨਹੀਓ ਲੈਣਾ ।

ਪੇਪਰਾਂ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੇਟ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲ ਕੇ ਜਿਸ ਸ਼ੈਅ ਨੂੰ  ਮਿਲਣੈ ਆਂ ਓਹਨੂੰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕਹਿੰਦੇ ਆਂ ।

ਮੁੰਨਾ ਕਹਿੰਦਾ - ਜਬ ਸ਼ਰਮੇ ਮੇਰੇੇਂ ਤੇ ਲਿਖਣਾ ਤੋ ਹਿੰਦੀ ਮੇਂ ਲਿਖਣਾ ਪੜਨੇ ਮੇ ਆਸਾਨੀ ਹੋਗੀ , ਮਖਿਆ ਮੁੰਨਾ 2 ਸਾਲ ਤੇਰੀ ਜਾਨ ਤੰਗ ਰੱਖੀ ਹੁਣ ਕੈਸੇ ਆਸਾਨ ਕਰ ਦੀਏ ।

ਦੇਖ ਭਾਈ ਹਿੰਦੀ ਲਿਖੂੰਗਾ ਤੋਂ ਤੇਰੇ ਘਰ ਦੇ ਭੀ ਪੜ ਸਕਦੇ ਐ , ਤੇ ਜੋ ਵੀ ਲਿਖੂੰਗਾ ਦਿਲੋਂ ਲਿਖੂੰਗਾ । ਜੇ ਦਿਲਾਂ ਤੋਂ ਲਿਖੂੰਗਾ ਤੇ ਹੇਲਪਿੰਗ ਵਰਬ (ਗਾਲ੍ਹ) ਵੀ ਨਿਕਲ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਕਰਕੇ ਪੰਜਾਬੀ ਠੀਕਿਓ ਆ ।ਬਾਕੀ ਨੀ ਤਾਂ ਭਰਜਾਈ ਤੋਂ ਟ੍ਰਾੰਸਲੈਟ ਕਰਾ ਲਈ ।
ਮੁੰਨਾ ਸੋਹਰੀ ਦਾ ਜਾਨ ਹੈ ਸਾਰਿਆਂ ਦੀ ।
ਉਹ ਜਿਮੇ ਗਰੀਬਾਂ ਦਾ ਇਕ ਰੋਬਨ ਹੁੱਡ ਹੁੰਦਾ....
ਮੁੰਡਿਆਂ ਦਾ ਕੁੜੀਆਂ ਚ ਇਕ ਭੈਣ ਦੁੱਗ ਹੁੰਦੈਂ....
ਯਾਰਾਂ ਬੇਲੀਆ ਲਈ ਜਿਗਰੇ ਆਲਾ combo pack Mannat Sharma ਉਹ ਆਹੀ ਹੈ ।
ਕਿਸੇ ਦੀ ਲੋੜ ਪੈਣ ਤੇ ਇਕ ਬੰਦਾ ਹਾਜ਼ਰ ਜਰੂਰ ਹੁੰਦੈ
ਓਹਦੇ ਵਿੱਚ ਮੁੰਨਾ ਆਪਣਾ ਜਰੂਰ ਹੁੰਦਾ ।

ਮੁੰਨਾ 11-A ਵਾਲਾ ਰਾਜਨੀਤੀ ਦਾ ਵਿਦਿਆਰਥੀ topper ਹੈ ਸ਼ਕਲ ਤੋਂ ਨਲੈਕ ਜਿਹਾ ਲੱਗਦਾ ਪਰ ਕਾਰਲ ਮਾਰਕਸ , ਲੈਨਿਨ , ਗੋਰਕੀ ਆਪਣੇ ਅੰਦਰ ਭਰੀ ਬੈਠਾ । ਬੱਸ ਦਿਲ ਦਾ ਟੋਟਾ ਹੈ ।
ਇਹਨੂੰ ਵੇਖ ਕੇ ਮਹਿਸੂਸ ਹੁੰਦਾ ਭੀ ਰਿਸ਼ਤੇ ਪਿਆਰ ਪਿਓਰ ਨਾਲ ਨੀ ਸਗੋਂ ਜ਼ਿੱਦ ਨਾਲ ਪੁੱਗਦੈਂ ਐ ।

ਮੁੰਨਾ ਸਪੈਸਲ ਟੂਸਨਾ ਵੀ ਦਿੰਦਾ ਕਮਜ਼ੋਰ ਬੱਚੀਆ ਨੂੰ ।
ਦਸੰਬਰ ਦੀ ਠੰਡ ਚ 3 ਵਜੇ ਜੋ ਪਰੌਂਠੇ ਖਾਣ ਦੀ ਹਿੰਮਤ ਰਜਾਈ ਚੋ ਨਿਕਲ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦਾ .... ਉਹ ਮੁੰਨਾ ਤੇ ਬੱਲੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਓੰ ਆ । ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਕਦੀ ਕਦਾਈਂ ਆਪਣੀ ਸਰਾਂ ਨੂੰ ਹੋਸਟਲ ਨਹੀਂ ਮੈਂਟਲ hospital ਕਹਿਣਾ ਚਾਹਿਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਬਾਹਰਲੀ ਦੁਨੀਆ ਚ ਇਹ ਜਹੀ ਝੜੰਮਗਿਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ਜੋ ਸਾਡੇ ਆਲੇ ਆ ਕਰਦੇ ਐ , ਧਰਮ ਨਾਲ ਮੇਰਾ ਤਾਂ ਨੋਰਮਲ ਲੋਕਾਂ ਵੱਲ ਵੇਖ ਕੇ ਹਾਸਾ ਨਿਕਲ ਆਉਂਦਾ ਭੀ ਸਾਲੇ ਕਿੰਮੇਂ ਦੇ ਲੋਕ ਆਂਹ । ਬਿਨਾ ਝੜੰਮਗਿਰੀ ਤੋਂ ਜਿਓੰਦੇ ਕਿਦਾਂ ।

ਰਾਤ ਨੂੰ ਜਦੋਂ ਕਿਤੇ ਲੰਗਰ ਹਾਲ (Mess)ਚੋ ਨਿਕਲਣਾ ....
ਤਾਂ ਖੰਡ ਸੌਂਫ ਦੀ ਮੁੱਠੀ ਭਰ ਕੇ ਖਾਂਦੇ ਆਉਣਾ ਤੇ  11A ਵਿਚ ਬਹਿ ਜਾਣਾ ।
ਗੱਲਾਂ ਦੇ ਇੰਨੇ ਤੱਤ ਕੱਢੇ ਜਾਂਦੇ ।
ਕਿ ਤੱਤ ਸਾਲਾ ਆਪ ਚੀੱਕ ਚੀੱਕ ਕਹਿੰਦਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਤਾਂ ਮੈਂ ਹੈ ਈ ਨੀ , ਜਿੰਨੀ ਮੇਰੀ ਲੱਸੀ ਕੱਢ ਦਿੰਦੇ ਓੰ ਸਾਲਿਓ ।
11A ਨੂੰ ਰੋਟੀ ਖਾਣ ਤੇ ਚਾਹ ਪੀਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹਮੇਸ਼ਾ ਮਿਸ ਕੀਤਾ ਜਾਏਗਾ ।
ਹੋਸਟਲ ਆਲੀ ਸਾਰੀ ਜਨਤਾ ਹੀ ਆਪਣੀ ਥਾਂ ਤੇ ਅੰਦਰ ਗਿਆਨ ਸਾਗਰ ਪਾਲ ਕੇ ਬੈਠੀ ਹੈ ।
ਸਾਰੇ ਹੀ ਮਾਤੜ ਖਾਸ ਨੇ ।
ਆਖ਼ਿਰੀ ਦਿਨ ਆ ਗਏ ਐ -
ਹੁਣ ਸਬਣਾ ਖਿੱਲਰ ਜਾਣਾ ।
ਇਹੀ ਕਹਿਣਾ ਮਾਤੜੋਂ ਹਾਰ ਤਾਂ ਜਮਾਂ ਮੰਨੀ ਦੀ ਨੀ ।
ਜਿੱਮੇ ਸਾਬਣ ਦੀ ਟਿੱਕੀ , ਸਰਫ ਵਰਤਣ ਬਾਅਦ ਮੁਕਰ ਜਾਂਦੇ ਸੀ ।
ਓਵੈਂ ਜਿੰਦਗੀ ਨਾਲ ਮਸ਼ਕਰੀਆਂ ਕਰਦੇ ਰਹਿਓ ।
ਗ਼ਹਾਂ ਵਧਦੇ ਰਹਿਓ ।
ਜੇ ਥੱਕ ਜਾਓ ਤਾਂ ਉਮਰ ਦੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਝਾਕੀ ਚ ਕਿਧਰੇ ਵੀ ਯਾਦ ਕਰ ਲੈਣਾ ਇਕ ਨਾਮ ਤੇ ਇਕ ਬੰਦਾ ਹਮੇਸ਼ਾ ਪਿੱਛੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਭਗਵਾਨ ਵਾਂਗੂ ਖੜਾ ਮਿਲੂਗਾ ।
ਤੇ ਜਾਓ ਮੇਰੇ ਸਾਰੇ ਅਰਜਨ ਵਰਗੇ ਆੜੀਓ ਜੜ ਦੋ ਤੀਰ ਜਿੰਦਗੀ ਦੀ ਅੱਖ ਚ 👍👍👍👍

ਝੰਡਾ ਡਿੱਗਣ ਨਹੀਂ ਦੇਣਾ ਤੇਲ ਡੁੱਲਣ ਨਹੀਂ ਦੇਣਾ ।
ਕਿੱਸੇ ਮੈਂ ਲਿਖਦਾ ਰਹੂ ਹੋਰਾਂ ਦੀ ਆਰੀ ਵੀ ਆਉਗੀ ।
ਗੁੱਛਾ ਨਈ ਕਰਨਾ ।

ਬਾਕੀ ਮੁੰਨਾ ਸਾਡਾ ਜਿਆਦਾ ਕੋਮਲ ਹੈ ।
ਫਿਰ ਵੀ ਸਾਰੇ ਜਣੇ ਯਾਦ ਰੱਖਿਓ
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਇਸ ਸਸਤੇ ਫਰੁਸਟ੍ਰੇਸ਼ਨ ਬਜ਼ਾਰ ਚੋ ਕਰੋਧ ਨਹੀਓ ਲੈਣਾ ........
100 ਪਰਸੇੰਟ ਸੇਲ ਹੋਵੇ ਭਾਵੇਂ ,ਲੋਡ ਨਹੀਓ ਲੈਣਾ ।
ਬੱਸ ਬੋਲਿਆ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦਾ ਇਸ ਕਰਕੇ ਆਂਹ ਲਿਖਕੇ ਕਹਿ ਦੇਣੇ ਆ ।
#labzu
#ਹੋਸਟਲ ਆਲੀ #ਲੰਘੋੜ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ😂😂😂😂😂

Thursday, 4 May 2017

Qissey May 4

4 may
5:20 am

Day 4 : अभी बारिश हो के रुकी , बारिश होने के बाद मिट्टी की ख़ुशबू और साफ़ शफाक सड़के और तुम्हारी हँसी । दुनिया में ऐसी एक चीज जिसे मैं सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ - तुम्हारी हँसी ।
आज भी वैसे ही था तुम खिलखिला कर हंस रही थी ।
सफ़ेद रंग की टीशर्ट में  तुम सच मानो बहुत क्यूट लगती हो । जब भी तुम कोशिश नही करती हो तो और भी खूबसूरत लगती हो । फिर से कहता हूँ "तुम्हें पता ही नहीं तुम मेरे लिए कितनी खूबसूरत हो ।
वैसे बताने के लिए बता रहा हूँ - जानती हो ज्यादतर लडकिया आज कल मुझे आज कल क्या कहती है - कि मैं उन पर कुछ लिखू ।
कौन समझाएं उन लड़कियो को के मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हें सोच कर ही तो लिख सकता हूँ ।
चाहे फिर A हो या बे या फिर मैंने आज तक कुछ भी लिखता हूँ तो उसमें तुम शामिल होती हो खैर तुम्हें इसकी खबर कहाँ तुम थोड़ा न समझोगी ।
तुम्हारे लिए तो आज भी सब कुछ झूठ है ।
तुम मेरा दिल रखने के लिए कभी कुछ नही बोलती
मैं तुम्हे क्यों इतना चाहता हूँ शायद कोई वजह नहीं ।

तुम्हें आज खिलखिला के हंसते देखा तो अच्छा लगा ऐसे ही हंसती रहा करो । तुम्हें हंसता हुआ देख आस्मां और बरसे जा रहा था ।
शायद हम एक दूसरे से बहुत दूर है
तुम्हारी दुनिया अलग मेरी अलग
बस अब से रोज़ यही से तुम मुझे मिलना ....वादा करो रोज़ मिलने का
तुम मुझे रोज़ पढ़ना ।
मैं तुम्हें रोज़ लिखूंगा , जब तुम मुझे पढ़ोगी तुम्हारे होंठो की आवाज़ मेरी ज़िन्दगी होगी ।
जिस दिन शायद ये लफ्ज़ तुम्हारे सिवा किसी और के लिए उकर आएं समझ लेना इस दुनिया में तुम्हें लिखने वाला शायद कोई एक बचा ही नहीं ।

Qissey 17/1



Wednesday, 26 April 2017

कोरापन

किसी ने सवाल किया ये जो तुम लिखा करते थे - इससे कोई पैसा वैसा भी मिलता हैं या बस यूँ ही ...

कुछ लोग सवाल के साथ जवाब भी खुद देते हैं

हमारी मुश्किलात आसान करने के लिए |

आसान जवाब था बस यूँ ही ...........|

बातचीत ख़तम हुई |


पर यूँ ही में कितना कुछ कहने से रोक लिया |

जो कह दिया वो बात जो रुक गए वो जज़्बात

नए साल में फिर से कुछ लिखने का मन भर आया |

बस यही सोचते सोचते ऐशट्रे में राख भर्ती जा रही थी |


मानो जैसे कोई चिट्ठी लिखने के बाद ये भूल जाए के ये चिट्ठी भेजनी किस पते पर है

कोई सालो से बंद घर खोल रहा हो

जहाँ पुराना और पुराना हो गया हो

सब कुछ धुंधला सा हो

इंतज़ार किया

सोचते सोचते डायरी के कुछ पन्ने और घंटे शहीद हो चुके थे  ।

Breakup - ਆਖ਼ਿਰੀ ਕਾਂਡ

ਮੈੱਸ ਚ ਰੋਟੀ ਖਾਂਦੇ ਨੂੰ "ਗਿੰਦੀ"  ਨਮੇਂਸ਼ੈਰ ਆਲਾ ਟੱਕਰ ਗਿਆ ।
ਆਂਹਦਾ ਬਾਈ - ਆਹ ਬਰੈਕੱਪ (Breakup) ਕਿਹੜੀ ਬਲਾਂ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਆ ???
ਮੈਂ ਪੁੱਛਿਆ -ਗਿੰਦੀ ਤੂੰ ਕੇਹੜੇ ਸਟੇਸ਼ਨ ਤੋਂ ਪੁੱਛਦੈ ?
ਕਹਿੰਦਾ ਬਾਈ - ਉੰ ਈ ਬਸ ,
ਉੱਤੋਂ ਕਿਤੈ ਗੱਲ ਆਈ ਪੁੱਛ ਲਿਆ ।
ਹੁੰਦਾ ਬੀਰੇ 😂😂 ਗਿੰਦੀ ਹੁੰਦੈਂ ।
ਐਗਜੈਂਪਲ ਦੇ ਕੇ ਖਾਣੇ ਪੌਣਾ -
ਆਖ਼ਿਰੀ ਸਮੈਸਟਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਚ ਜਾ ਕੇ ਇਹੋ ਜਏ ਹਾਲਾਤ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਆ .....
ਜ਼ਿਮੇ ਅਕਸਰ ਪੱਕੀ ਵੱਢੀ ਫ਼ਸਲ ਤੇ ਮੀਂਹ ਪੈਣ ਦਾ ਖਤਰਾ ਹੁੰਦਾ ।
🤔🤔🤔 ।
ਦੇਖ ਪ੍ਰਧਾਨ ਓਮੇ ਏਹ ਤੁੱਲਾਕ ਤੁੱਲਾਕ ਆਂਗੂ ਈ ਹੁੰਦੈਂ ,
ਜਦੋ ਵਿਆਹ ਵਰਿਆ ... ਛੱਡ ਛੱਡਾ ... ਮਗਰੋਂ ਲਾਉਂਦੈ
ਤਲਾਕ ਹੁੰਦਾ ।
ਤੇ ਜਦੋਂ ਆਖ਼ਿਰੀ ਸਮੈਸਟਰ ਚ ਗੱਲ ਅੱਗੇ ਨਾ ਜਾਵੇ ਓਹਨੂੰ #ਬਰੈਕੱਪ ਕਹਿੰਦੈ ।
ਗਿੰਦੀ ਫਿਰ ਆਂਹਦਾ - ਤਲਾਕ ਚ ਤਾ ਹਰਜ਼ਾਨਾ ਬੜੈ ਠੁਕਦੈ ।
ਤੇ ਬਰੈਕੱਪ ਚ ਕੱਖ ਨਹੀਂ ਠੁਕਦੈ ??
ਮੈ ਅਖਿਆ- ਕ੍ਯੂਂ ਨੀ ਠੁਕਦੈ ,  ਅਗਲੀ ਠੋਕਦੀ ਐ 349,350,351,354 ਦੇ ਨਾਲ 509 ਆਦਿ 🙄🙄🙄
ਗਿੰਦੀ ਗੱਲ ਮੱਕਾ ਕੇ ਆਂਹਦਾ - " ਬੰਦੇ ਨੂੰ ਨਾ ਪ੍ਰੇਮ ਪਿਆਰ ਨਾਲ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ । ਬਰੈਕੱਪ ਤਾਂ ਮਾੜੀ ਚੀਜ ਹੋਈ ਤਾ ਫੇਰ ਬਈ ।
ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਗਹਾਂ ਆਲੀ ਦਾ ਕੀ ਭਰੋਸਾ ..... ਗਹਾਂ ਜਾ ਕੇ ਕੀ ਠੋਕਦੇ

ਢੂਹੀ ਮਾਰੋ ਇਹੋ ਜੇ 😂😂😂😂
ਮੈ ਅਖਿਆ -ਗਿੰਦੀ ਐਮੇ ਨਾ ਜੱਕੜ ਮਾਰੀ ਜਾ , ਆਪਾਂ ਮਾਝੇ ਖੋਲਤੇ ਆਂ, ਇਥੋਂ ਢੂਹੀ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਨੂੰ ਸਮਝਦੇ ਆ ।

ਅਗਿਓ ਮੋਗੇ ਆਲਾ ਪ੍ਰਧਾਨ ਕਹਿੰਦਾ - ਚਲ ਬਾਹਮਣਾਂ ਚੱਲੀਏ ਤੂੰ ਆਬਦਾ ਥੁੱਕ ਨਾ ਮਕਾ ਏਹੇ ਦੁਆਬੇ ਆਲਾ ਐ ।
ਖੋਰੇ ਇਹ ਬੀ ਢੂਹੀ ਨੂੰ ਕੀਂ ਕੁਸ਼ ਕੇਹਦੇ ਆ 😂😂
ਆਪਾ ਚੱਲ ਕੇ ਚਾਹ ਪੀਐ ।।

लोरी

वो किस्से कहीं रख भूल गया हूँ ,
वो कहानियां लिख कर भूल गया हूँ ,
वो बचपन कहीं भूल गया हूँ ,

वो सारे किस्से,
वो कहानियां ,
कुछ दादी की ,
कुछ नानी की .....

वो कहानियां जिसमें राम भगवान् थे ..
जिसमें सीता माता थी ...
जिसमें रावण था

एक वो कहानी जिसमें
जिन्हं होते थे
चिराग भी घर हुआ करते थे .....

सब जादूई हुआ करता था ...
कोई मकड़ी का जाल फ़ेंक ...
सब को बचाने आ जाता था ...

तब तक सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था
दुनिया में .......

फिर कुछ दिन बाद
हाथो से सारे दोस्त छीन ले गया कोई...

फिर एक दिन तुमने उन सच्चे जिन्दा लोगो को ,
राजा रानी को ....
जींनी को ,
सिर्फ कहानी मानना सीख लिया ।

तुमने बड़े आराम से कह दिया ,
दादी और नानी भोली थी .....

आज मैंने
डायरी के पन्ने खोले।
सूखे सुर्ख गुलाबों के पत्तों में
बंद जिन्दगी खुल गयी।

चाँद वैसे के वैसा ही है
जैसे पहले छत से रोज़ बातें करता था ...
अब न ही कोई हाथी , घोडा हैं ...
वहां तक जाने के लिए पैदल ही जाना है ।

फिर से कोई भोला भाला
पागल भेजो न ....
जो दिन भर वो सब कुछ सुनने आये
रात होते ही सर सहलाये
कुछ बुनते बुनते
सुनते सुनते नींद आ जाये ।

मगर राम तो आज भी है ,
सीता तो आज भी है ,
बस एक रावण ही है
जो Anti-Hero हो गया है
अब देखो दुनिया की हालत .......!!!!!


पंकज शर्मा

तारीफ़

"ਤਨ ਦੇ ਪਰਦੇ ਪਿੱਛੇ ਮਨ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ਕੀ ਕਰਦਾ ਹੈਂ, ਕੋਈ ਨਹੀਂ ਜਾਣਦਾ" तेरी जीत लिखूं या अपनी हार लिखूं उसकी नफ़रत लिखूं या अपना प्यार लिखूं.....