Wednesday, 26 April 2017

कोरापन

किसी ने सवाल किया ये जो तुम लिखा करते थे - इससे कोई पैसा वैसा भी मिलता हैं या बस यूँ ही ...

कुछ लोग सवाल के साथ जवाब भी खुद देते हैं

हमारी मुश्किलात आसान करने के लिए |

आसान जवाब था बस यूँ ही ...........|

बातचीत ख़तम हुई |


पर यूँ ही में कितना कुछ कहने से रोक लिया |

जो कह दिया वो बात जो रुक गए वो जज़्बात

नए साल में फिर से कुछ लिखने का मन भर आया |

बस यही सोचते सोचते ऐशट्रे में राख भर्ती जा रही थी |


मानो जैसे कोई चिट्ठी लिखने के बाद ये भूल जाए के ये चिट्ठी भेजनी किस पते पर है

कोई सालो से बंद घर खोल रहा हो

जहाँ पुराना और पुराना हो गया हो

सब कुछ धुंधला सा हो

इंतज़ार किया

सोचते सोचते डायरी के कुछ पन्ने और घंटे शहीद हो चुके थे  ।

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ਬੱਲੀ

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