मैं कभी भी कोई बैंक कर्मचारी नहीं बनना चाहता हूँ ..
न ही खाने पीने की चीजों की बिक्री करने वाला ...
न ही विदेशी कंपनियों का सेल्समैन...
न ही कोई संघी
न ही हुड़दंगी
न किसी पार्टी का मुखिया
और न ही कोई टैक्सी ड्राइवर
न ही इधर उधर फुदकता सुपरहीरो
मैं तो चाहता था बस उसे देख स्कू
बस इतना चाहता था
शहर की सबसे ऊंची जगह पे खड़ा हो के
नीचे घनी इमारतों के बीच
उस लड़की का घर देख स्कू
जिससे मैं मोहब्बत करता हूँ
इस लिए मैं एक मजदूर बन गया ।
मेरी रचनाएं अक्सर यथार्थ व कल्पना का मिश्रण व प्रतिबिम्ब होती हैं और ये आवश्यक नहीं कि वो मेरी व्यक्तिगत जीवन की घटनायें ही हों | हमारे साथियो की तरह आप भी हमें - लेखक, विचारक , ब्लॉगर , क़ाबिल बेरोज़गार, भारतीय, सीधा साधा ,बातूनी , चंट, चालाक ,चटपटा, चटोरा ,पागल कह सकते हैं ...| एक बार qissey पढ़कर देखिये बाकी मर्जी के मालिक आप है| रंगमच मेरी एकलौती मोहब्बत है |
Sunday, 8 October 2017
इबादत
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तारीफ़
"ਤਨ ਦੇ ਪਰਦੇ ਪਿੱਛੇ ਮਨ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ਕੀ ਕਰਦਾ ਹੈਂ, ਕੋਈ ਨਹੀਂ ਜਾਣਦਾ" तेरी जीत लिखूं या अपनी हार लिखूं उसकी नफ़रत लिखूं या अपना प्यार लिखूं.....
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| बारिश | रात का वक़्त आसमान से गरजती बिजलियाँ ... खिड़की के बाहर से अंदर आती हवा जैसे इशारा कर रही हो .. कुछ बताना चाह रही हो ये july ...
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ਦਿੱਲੀ ਆਏ ਨੂੰ 6 ਮਹੀਨੇ ਹੋ ਗਏ । 2011 ਤੋੰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਨਾਲ ਮੈਂ ਖੇਡ ਰਿਹਾ ਤੇ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਮੇਰੇ ਨਾਲ ਖੇਡ ਰਹੀ ਹੈ । ਜਿੰਦਗੀ ਹਰ ਵਾਰ ਮੇਰੇ ਸਾਹਮਣੇ ਕੁਝ ਨਵਾਂ ਪਰੋਸ ਕੇ ਰੱਖ...
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किसी ने पूछा - ज़िन्दगी को क्या समझते हो | ज़िन्दगी- सफर , उम्मीद , इंतज़ार , तलाश , चाहत और हिम्मत " शायद ...
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इस बार बहुत लम्बा वक्फा हो गया है लिखे हुए | कुछ तो लिखूं ...... मगर क्या लिखूं ... लिखते नहीं , बयां करते हैं... कुछ एहसास ..अपनी ...
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दोस्त से फोटोज मांगने के लिए बिनै पत्र | सेवा में, सचिन भाई , डी ए वी स्कूल, मलोट . श्रीमान BC जी , निवेदन यह है कि मेरे बड़े भाई ज...
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