मेरा नाम
क्या होता अगर ये सब न होता ….
कुछ यूँ होता …. जो सोचा न होता ….
मिलते हम भी किसी सरे बाजार में …..
न होती ये गुंजाइशें ..
बस देखते यूँ बाद टकराने … .
यूँ होता कोई मंज़र
न होती दरमियान ये सिफारशें ….
न होती ये बेचैन सी मुस्कराहटें ..
बस होती बेलफ़ज़ सी बाते ….
बस होते हम होते एक दोनों …
न होती कोई शिकवे शिकायते ….
तुम पुकारो मुझे मेरे ही नाम से ...
तेरे पुकारने से ही तो मुझे अपनी खबर मिलती हैं ..
और जब कोई पुकारे मेरा नाम ..
तेरा यूँ पलट के देखना
तेरी इसी बात में तो ही मुझे मोहब्बत दिखती हैं
- पंकज शर्मा -

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