हम सब के पास हर कहानी के दो वर्ज़न होते हैं
एक दुसरो को सुनाने के लिए
और एक खुद को समझाने के लिए |
जैसे कि प्यार भी
हम सब एक ही तरह के बिज़नेस में हैं
Show Off बिज़नेस
चाहे कितनी भी सादगी से किया जाए |
इधर उधर चाय सिगरेट सुलगाते सुलगाते कोई न कोई आशिक़ भूतिया हर वक़्त फ़ोन पे बतियाता मिल जाता हैं और एक घिस्सी पिट्टी लाइनों को हर तरफ सरकारी पोचे कि तरह चलाता हैं |
हंसी आती सुन के ...
प्यार की सबसे खूबसूरत बात उसके साथ आने वाली परेशानियाँ हैं, अड़ंगे हैं, मुश्किलें हैं,
हाँ हाँ आपको भी बता देता हूँ ...
लाएं कान और आँखों से गौर कीजिये
एक बात पूछूं” ?
“पूछो”
"तुम मुझे सच में प्यार करते हो”
“हाँ”
क्यों?
“बस ऐसे ही”
“ऐसे ही? बताओ न”
हाँ बाबा हाँ
समझ में नहीं आता किसी को पसंद करने या प्यार करने की कोई वज़ह होना ज़रूरी है?
बिना वज़ह के कोई किसी को कैसे प्यार कर सकता है”?
“प्यार दुनिया की सबसे अच्छी बात है ही इसलिए क्योंकि उसके पीछे कोई वज़ह नहीं होती. कोई लॉजिक नहीं होता. जो बातें समझ आ जाती हैं वो साधारण हो जाती हैं. क्योंकि उनमें कोई रहस्य या मिस्ट्री बाकी नहीं रहते . एक्साइटमेंट नहीं रह जाता. इसीलिए बाक़ी बातें उतनी सुन्दर हो ही नहीं सकतीं जितना कि प्यार. जिस दिन इंसान ये समझ गया उसे प्यार क्यों होता है, प्यार भी मैथ्स की थ्योरम की तरह बोरिंग हो जाएगा |
इश्क़ में कहते हो हैरान हुए जाते हैं,
ये नहीं कहते कि इन्सान हुए जाते हैं।
कमिटमेंट और लॉयल्टी जैसे शब्द नौकरी में अच्छे लगते है, प्यार में इन शब्दों से गुलामी की बू आती है. अगर हमें कोई गुलाब का फूल बहुत अच्छा लगता है तो उसके उसको डब्बे में बंद करके मारने की बजाय हमें गमले में दूसरे के लिए छोड़ देना चाहिए. याद करो अपने साथ के वो लोग जो दिन भर में दस बार love you forever बोलते थे.
आज देखो उनको कहां गए वो लोग और कहां गया उनका प्यार |
प्यार को समझने की कोशिश करना बेईमानी है. अगर इस दुनिया में कुछ समझने और सहेजने लायक है तो वो हैं ‘पल’ और पल का कोई सच-झूठ, सही-गलत, पास्ट-फ्युचर नहीं होता |
अगली बार एक दूसरे को पक्का पहला प्यार करेंगे.
ज़िन्दगी क्या हैं ?
एक सवाल ही तो हैं |
और तुमसे प्यार क्या है ......??
एक ख्याल ही तो हैं |
पंकज शर्मा
एक दुसरो को सुनाने के लिए
और एक खुद को समझाने के लिए |
जैसे कि प्यार भी
हम सब एक ही तरह के बिज़नेस में हैं
Show Off बिज़नेस
चाहे कितनी भी सादगी से किया जाए |
इधर उधर चाय सिगरेट सुलगाते सुलगाते कोई न कोई आशिक़ भूतिया हर वक़्त फ़ोन पे बतियाता मिल जाता हैं और एक घिस्सी पिट्टी लाइनों को हर तरफ सरकारी पोचे कि तरह चलाता हैं |
हंसी आती सुन के ...
प्यार की सबसे खूबसूरत बात उसके साथ आने वाली परेशानियाँ हैं, अड़ंगे हैं, मुश्किलें हैं,
हाँ हाँ आपको भी बता देता हूँ ...
लाएं कान और आँखों से गौर कीजिये
एक बात पूछूं” ?
“पूछो”
"तुम मुझे सच में प्यार करते हो”
“हाँ”
क्यों?
“बस ऐसे ही”
“ऐसे ही? बताओ न”
हाँ बाबा हाँ
समझ में नहीं आता किसी को पसंद करने या प्यार करने की कोई वज़ह होना ज़रूरी है?
बिना वज़ह के कोई किसी को कैसे प्यार कर सकता है”?
“प्यार दुनिया की सबसे अच्छी बात है ही इसलिए क्योंकि उसके पीछे कोई वज़ह नहीं होती. कोई लॉजिक नहीं होता. जो बातें समझ आ जाती हैं वो साधारण हो जाती हैं. क्योंकि उनमें कोई रहस्य या मिस्ट्री बाकी नहीं रहते . एक्साइटमेंट नहीं रह जाता. इसीलिए बाक़ी बातें उतनी सुन्दर हो ही नहीं सकतीं जितना कि प्यार. जिस दिन इंसान ये समझ गया उसे प्यार क्यों होता है, प्यार भी मैथ्स की थ्योरम की तरह बोरिंग हो जाएगा |
इश्क़ में कहते हो हैरान हुए जाते हैं,
ये नहीं कहते कि इन्सान हुए जाते हैं।
कमिटमेंट और लॉयल्टी जैसे शब्द नौकरी में अच्छे लगते है, प्यार में इन शब्दों से गुलामी की बू आती है. अगर हमें कोई गुलाब का फूल बहुत अच्छा लगता है तो उसके उसको डब्बे में बंद करके मारने की बजाय हमें गमले में दूसरे के लिए छोड़ देना चाहिए. याद करो अपने साथ के वो लोग जो दिन भर में दस बार love you forever बोलते थे.
आज देखो उनको कहां गए वो लोग और कहां गया उनका प्यार |
प्यार को समझने की कोशिश करना बेईमानी है. अगर इस दुनिया में कुछ समझने और सहेजने लायक है तो वो हैं ‘पल’ और पल का कोई सच-झूठ, सही-गलत, पास्ट-फ्युचर नहीं होता |
अगली बार एक दूसरे को पक्का पहला प्यार करेंगे.
ज़िन्दगी क्या हैं ?
एक सवाल ही तो हैं |
और तुमसे प्यार क्या है ......??
एक ख्याल ही तो हैं |
पंकज शर्मा

No comments:
Post a Comment