मैं सलमान की अदाकारी और HUMAN BEING का फैन हूँ ....कॉलेज के सेकंड ईयर में exam बीच में छोड़कर मलोट से पटिआला आपकी बॉडीगार्ड की शूटिंग देखने आया था | सुपरस्टार सही मायनो में कहा जाये तो सलमान को कह सकते हैं | सलमान की कई फिल्में मैंने देखीं, मुझे पर्दे का सलमान अच्छा लगता है। थोड़ा ज़्यादा बदमाश है, मगर वह अपनी धुन का हीरो है। 'करण अर्जुन' हो या 'अंदाज़ अपना-अपना'। कभी बाग़ी तो कभी जोकर लगता है। कभी अनाड़ी तो कभी छलिया लगता है। 'हम दिल दे चुके सनम' में जब ऐश्वर्या आपको नींबू से मारा था, आपकी फिल्म कभी सिनेमाहॉल से बाहर तो नहीं जा सकी, लेकिन लौटते वक्त आप मेरे साथ ज़रूर आए।
फैसले का सम्मान करता हूँ, पर सलमान खान और संजय दत्त अगर अभिनेता ना होकर नेता होते तो अब तक एक भी गवाह जिंदा ना होता और केस बंद हो चुका होता। सलमान की गाड़ी के नीचे दबकर तो एक इंसान मर गया। पर न्याय व्यवस्था के तले दबकर जो लाखों मर रहे हैं उसकी सजा किसको होगी | तेरह साल से चल रहे हिट एंड रन केस में दोषी पाये जाने के बाद आज बम्बई हाई कोर्ट ने सलमान खान को ज़मानत दे दी है। ... एक नेक इंसान होने के नाते सलमान के लिए थोडी हमदर्दी तो हम सब में है पर कानून की नजर में दोषी, दोषी होता फिर वो चाहे Common Man हो या Salman.....
कोर्ट को ये साबित करने में 27 गवाहों के बयान दर्ज करने पड़े, 13 साल तक सुनवाई करनी पड़ी, नतीजा अब आपके सामने है। खैर कोर्ट के फैसले से लोगों में कानून के प्रति सम्मान तो बढ़ा है। लेकिन इस फैसले का हाल तो उसी कहावत को सच करता करती है कि ‘का वर्षा जब कृषि सुखानी’ उपर से इस सजा से उन गरीबों का पेट तो भरने से रहा, जिस पर कोर्ट ने गौर नहीं किया। जबकि हिंदुस्तान की न्याय व्यवस्था इतनी बोरिंग है कि जिंदगी गुजर जाती है, पीढ़ीयां खत्म हो जाती हैं। आरोपी दुनिया छोड़ देता है, लेकिन न्यायिक लड़ाई अपनी रफ्तार से चलती रहती है। इस व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो। ये कानून भी बस जिंदगी चलाने की सांस जैसी हो जाएगी। जो सिर्फ नाम के लिए रहेगी, पर वो जिंदगी रहकर भी मौत से बदसूरत लगती है।
खैर सलमान का आशियाना अब ऑर्थर रोड जेल बन गया है। उनके वकील जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंच गए, लेकिन सजा सुनते ही सलमान की आखें आसुओं से डबडबा गयीं। जुबान पर ताला लगा लिया, लेकिन आंखों से सबकुछ बयां करते रहे और सिर झुकाकर स्वीकार करते रहे। कोर्ट का फैसला सुन उनकी मां बेहोश हो गयी। बहनें आंसू बहाती रही और भाई भारी मन से अदालत के बाहर निकल गए। सलमान खान की सजा पे हम मिडिल क्लास लोगों का सोंचना है |
" चलो कम से कम उसने अपनी बहन की शादी की जिम्मेदारी जेल जाने से पहले निभा दी थी "
फैसले का सम्मान करता हूँ, पर सलमान खान और संजय दत्त अगर अभिनेता ना होकर नेता होते तो अब तक एक भी गवाह जिंदा ना होता और केस बंद हो चुका होता। सलमान की गाड़ी के नीचे दबकर तो एक इंसान मर गया। पर न्याय व्यवस्था के तले दबकर जो लाखों मर रहे हैं उसकी सजा किसको होगी | तेरह साल से चल रहे हिट एंड रन केस में दोषी पाये जाने के बाद आज बम्बई हाई कोर्ट ने सलमान खान को ज़मानत दे दी है। ... एक नेक इंसान होने के नाते सलमान के लिए थोडी हमदर्दी तो हम सब में है पर कानून की नजर में दोषी, दोषी होता फिर वो चाहे Common Man हो या Salman.....
कोर्ट को ये साबित करने में 27 गवाहों के बयान दर्ज करने पड़े, 13 साल तक सुनवाई करनी पड़ी, नतीजा अब आपके सामने है। खैर कोर्ट के फैसले से लोगों में कानून के प्रति सम्मान तो बढ़ा है। लेकिन इस फैसले का हाल तो उसी कहावत को सच करता करती है कि ‘का वर्षा जब कृषि सुखानी’ उपर से इस सजा से उन गरीबों का पेट तो भरने से रहा, जिस पर कोर्ट ने गौर नहीं किया। जबकि हिंदुस्तान की न्याय व्यवस्था इतनी बोरिंग है कि जिंदगी गुजर जाती है, पीढ़ीयां खत्म हो जाती हैं। आरोपी दुनिया छोड़ देता है, लेकिन न्यायिक लड़ाई अपनी रफ्तार से चलती रहती है। इस व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो। ये कानून भी बस जिंदगी चलाने की सांस जैसी हो जाएगी। जो सिर्फ नाम के लिए रहेगी, पर वो जिंदगी रहकर भी मौत से बदसूरत लगती है।
खैर सलमान का आशियाना अब ऑर्थर रोड जेल बन गया है। उनके वकील जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंच गए, लेकिन सजा सुनते ही सलमान की आखें आसुओं से डबडबा गयीं। जुबान पर ताला लगा लिया, लेकिन आंखों से सबकुछ बयां करते रहे और सिर झुकाकर स्वीकार करते रहे। कोर्ट का फैसला सुन उनकी मां बेहोश हो गयी। बहनें आंसू बहाती रही और भाई भारी मन से अदालत के बाहर निकल गए। सलमान खान की सजा पे हम मिडिल क्लास लोगों का सोंचना है |
" चलो कम से कम उसने अपनी बहन की शादी की जिम्मेदारी जेल जाने से पहले निभा दी थी "
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